किसान सेवा केंद्र कैसे खोले? ( Code 0198 )

किसान सेवा केंद्र कैसे खोले?

किसान सेवा केंद्र कैसे खोले?

हमारा देश एक कृषि प्रधान देश है। इसलिए हमारे देश की आज भी सबसे ज्‍यादा आबादी कृषि कार्यो से जुड़ी है। लेकिन आज भी हम देखते हैं कि आधुनिक कृषि हमारे देश में बेहद कम लोग करते हैं। इसका कारण है कि लोगों में जानकारी का अभाव है। इसे खत्‍म करने के लिए जरूरी है कि हर गांव में एक कृषि सेवा केंद्र अवश्‍य रूप से खुले। जिसे युवा ही खोल सकते हैं।

ऐसे में यदि आप भी जानना चाहते हैं कि कृषि सेवा केंद्र क्‍या होते हैं। इन्‍हें आप कैसे खोल सकते हैं। इनमें लागत और मुनाफा कितना होता है। तो हमारे इस लेख को अंत तक पढि़ए।

 

कृषि सेवा केंद्र किसे कहते हैं?

 

कृषि सेवा केंद्र को आम भाषा में खाद और बीज की दुकान भी कहते हैं। इनका मकसद होता है कि किसानों को आधुनिक कृषि के बारे में ज्‍यादा से ज्‍यादा जागरूक किया जा सके। क्‍योंकि कृषि सेवा केंद्र एक तरह से महज दुकान ही नहीं ये एक परामर्श केन्द्र भी होता है। क्‍योंकि इसका लाइसेंस केवल उन्‍हीं लोगों को दिया जाता है। जो कि कृषि से संबधित किसी तरह की पढाई किए होते हैं। ताकि लोगों में गलत जानकारी ना फैले।

आपको कृषि सेवा केंद्र पर किसानों के लिए खाद, बीज और कीटनाशक उचित रेट पर तो मिल ही जाते हैं। साथ ही वहां खेती के बारे में यदि कुछ जानना और समझना चाहते हैं तो उसे भी पूछ सकते हैं। वो लोग आपको निशुल्‍क परामर्श देने का भी काम करते हैं।

 

कृषि सेवा केंद्र खोलने के फायदे

 

  • यह एक सदाबहार और कहीं भी चलने वाला बिजनेस है। इसे आप अपने गांव के चौक चौराहे पर भी आसानी से कर सकते हैं।
  • बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का यह एक ऐसा साधन है। जिसके अंदर उन्‍हें कहीं दूर ना जाकर अपने गांव देहात में ही काम मिल जाता है।
  • इसमें अधिक प्रचार प्रसार की और लागत की भी अवश्‍यकता नहीं होती है। बस आपको अपने गांव के लोग जानते हों। इसी से आपका काम चल जाएगा।
  • खेती के सीजन में आप इससे अच्‍छी आमदनी कर सकते हैं। वो भी केवल अपने गांव में ही रहकर।
  • यह काम केवल दिन में चलता है। इसलिए कृषि सेवा केंद्र आप सुबह शाम अपने घर के काम भी आसानी से निपटा सकते हैं।

 

किसान सेवा केंद्र कैसे खोलें?

 

आइए अब हम आपको जानकारी देते हैं कि यदि आप किसान सेवा केंद्र खोलने के इच्‍छुक हैं तो इसे कैसे खोल सकते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप हमारी पूरी जानकारी को अच्‍छे से पढ़ें। ताकि जब आप कृषि सेवा केंद्र खोलने के लिए आवेदन करें तो आपको किसी तरह से कोई परेशानी ना आए।

 

कृषि सेवा केंद्र का प्‍लान तैयार करें

 

यदि आप कृषि सेवा केंद्र खोलना चाहते हैं तो आपको इसके लिए सबसे पहले एक प्‍लान तैयार करना होगा। जिसे हम ब्‍लू प्रिंट (Blue Print) कहते हैं। इसके अंदर आपको अपने दिमाग में ही मोटा माटी हिसाब किताब लगाना होगा कि आपको कृषि सेवा केंद्र कहां खोलना है। उसके लिए आपके पास कितने पैसें हैं।

आप जो काम करने जा रहे हैं उसमें आप अकेले रहेंगे या आपका कोई सहयोगी भी रहेगा। इस तरह की प्‍लानिंग किसी भी काम को शुरू करने से पहले बेहद अहम मानी जाती है। एक तरह से यह आपका आगे का काम आसान कर देती है।

कृषि केंद्र की ट्रेनिंग लें

 

यदि आप किसान सेवा केंद्र के काम की जानकारी नहीं है तो आपको चाहिए कि आप किसी कृषि सेवा केंद्र पर जाकर कुछ समय काम सीख लें। इससे आपको ग्राहकों से बात करना और किस तरह के सामान की मांग कब होती है।

क्‍योंकि अक्‍सर देखा जाता है कि आपने जो कुछ किताबों में पढ़ा है वो हकीकत से बिल्‍कुल अलग होता है। इसलिए सामाजिक माहौल को समझने के लिए आप कुछ महीने कहीं काम कर लें। ताकि आपको दुकानदारी की समझ हो जाए।

 

कृषि सेवा केंद्र की जगह का चुनाव करें

 

इसके बाद आपको दुकान की जगह का चुनाव करना होता है। इसके अंदर आपको दो जगह सबसे अहम हो सकती है। पहली तो आपके आसपास जो कृषि मंडी है आप वहां अपनी दुकान खोल लें। इसके बाद आप अपना किसान सेवा केंद्र अपने गांव में खोल सकते हैं।

क्‍योंकि मंडी में अक्‍सर किसान का आवागमन लगा ही रहता है। जबकि यदि आप अपने गांव में दुकान खोलते हैं तो किसानों से आपका सीधा संपर्क रहेगा। जिससे वो अपने गांव के गांव में ही खाद, बीज और कीटनाशक खरीद लिया करेंगे। जिससे उनका समय और किराया बच जाएगा। यदि आपके पास खुद की दुकान है तो सबसे अच्‍छा वरना आप किराए पर भी दुकान ले सकते हैं।

 

गोडाउन की व्‍यवस्‍था करें

 

क्‍योंकि कृषि सेवा केंद्र पर आपको खाद बीज और कीटनाशक का भारी मात्रा में स्‍टॉक रखना होगा। इसलिए यदि आपके पास जो दुकान है वह छोटी है तो आपको आसपास कहीं गोडाउन की व्‍यवस्‍था भी करनी पड़ती है। इसके अंदर आप आसपास कहीं खाली कमरा या कोई गोदाम देख सकते हैं। वहां आप खाद और बीज के बोरे रख दीजिए। इसके बाद जब भी ग्राहक आए और कई बोरे खाद बीज की मांग करे तो उसे गोडाउन से उठाकर दे दीजिए।

लाइसेंस के लिए आवेदन करें

 

दुकान लेने के बाद आपको कृषि सेवा केंद्र के लाइसेंस के लिए आवेदन करना होता है। इसके अंदर आप चाहे तो ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं या ऑफलाइन माध्‍यम से। यदि आपको लाइसेंस की सही जानकारी नहीं है। तो आप अपने नजदीकी कृषि विभाग में चले जाइए। वहां आपको एक आवेदन फार्म दे दिया जाएगा। आप उसे भरकर जमा करवा दीजिए। इसके बाद यदि आपकी सभी चीजें सही पाई जाती हैं तो लाइसेंस जारी कर दिया जाएगा। जिसे आप कुछ दिन बाद जाकर ले सकते हैं।

 

आवेदन के लिए जरूरी दस्‍तावेज

 

  • आवेदनकर्ता का आधार कार्ड।
  • आवेदनकर्ता की शिक्षा से संबधित दस्‍तावेज।
  • आवेदक की दुकान से संबधित दस्‍तावेज और GST नंबर आदि से जुड़ी जानकारी।
  • आवेदक का स्‍थाई निवास प्रमाण पत्र।
  • आवेदक यदि आरक्षित जाति से है तो उसका जाति प्रमाण पत्र।
  • आवेदक का मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी।

 

खाद का लाइसेंस लेने की योग्यता

 

कृषि सेवा केंद्र पर आप कुल तीन चीजें बेच सकते हो। इसमें खाद, बीज और कीटनाशक शामिल हैं। ऐसे में तीनों चीजों का लाइसेंस भी अलग अलग लेना होगा। यदि हम खाद के लाइसेंस की बात करें तो इसके लिए जरूरी है कि आप कम से कम दसवीं पास हों।

इस आधार पर आपको एक बार में 3 साल के लिए लाइसेंस दे दिया जाएगा। जिसके बाद समय समय पर आपको उसे आगे बढ़वाना होगा। यदि हम इसकी फीस की बात करें तो यह लगभग 1 हजार रूपए के आसपास रहती है। जो कि समय समय पर बदलती रहती है।

 

बीज के लाइसेंस की योग्यता

 

यदि आप खाद के साथ बीज का भी लाइसेंस लेना चाहते हैं तो इसके लिए आपके पास बीएससी एग्रीकल्‍चर (Bsc Agriculture) से होनी जरूरी है। अन्‍यथा आपके पास बीएससी में कैमेस्ट्री विषय का होना जरूरी है। यदि आप किसी दूसरे विषय में ग्रेजुएट हैं तो आपके लिए तमाम राज्‍यों में समय समय पर ट्रेनिंग कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

आप उनमें भाग लेकर भी कृषि सेवा केंद्र का लाइसेंस लेने के योग्य हो जाते हैं। बीज का लाइसेंस भी कुल तीन साल के लिए दिया जाता है। जबकि इसकी फीस भी आपको 1 हजार रूपए के आसपास देखने को मिलेगी।

 

कीटनाशक का लाइसेंस लेने की योग्यता

 

यदि आप खाद, बीज के साथ कीटनाशक का लाइसेंस भी लेना चाहते हैं। तो आपको इसके लिए भी बीएससी एग्रीकल्‍चर से या कैमेस्‍ट्री विषय के साथ पास होना अनिवार्य है। साधारण ग्रेजुएट लोगों के लिए ट्रेनिंग कार्यक्रम की व्‍यवस्‍था की जाती है। आप उनमें भाग लेकर कृषी सेवा केंद्र खोलने के योग्य हो जाते हैं।

यदि हम कीटनाशक के लाइसेंस की वैधता की बात करें तो यह कुल 6 महीने तक वैध होता है। जबकि इसकी फीस भी आपको लगभग 1 हजार रूपए के आसपास देखने को मिल जाएगी। इसे लेने के बाद आप अपने कृषि सेवा केंद्र पर कीटनाशक आदि भी रख सकते हैं।

 

बिना योग्यता के लाइसेंस कैसे लें?

 

यदि आपके पास ये डिग्री नहीं है तो भी आप यदि कृषि सेवा केंद्र खोलना चाहते हैं तो आप इसे आसानी से खोल सकते हैं। इसमें आप सबसे पहले कोशिश कीजिए कि आपके परिवार के जिस आदमी के पास ये योग्यता हो आप उसके नाम पर लाइसेंस ले लीजिए। बस फिर आप आसानी से अपना कृषि सेवा केंद्र खोल सकते हैं।

लेकिन यदि ऐसा नहीं है तो आप किसी ऐसे इंसान की तलाश कीजिए जो कि आपके साथ या तो साझे में काम करने का इच्‍छुक हो या आपकी दुकान पर काम करना चाहता हो। बस वह लाइसेंस की योग्यता पूरी करता हो। इसके बाद आप उसके साथ बातचीत कीजिए और यदि वह सहमत होता है तो आप काम आगे शुरू कर दीजिए। उसे रोजगार का सहारा हो जाएगा और आपको उसी के ऊपर लाइसेंस मिल जाएगा।

 

खाद, बीज और कीटनाशक खरीदें

 

जब आपकी बात पूरी तरह से लाइसेंस की बन जाती है तो आपको चाहिए कि आप अब अपनी दुकान का सारा सामान खरीद लें। इसके लिए सभी कंपनियों के हर जिले में विक्रेता बैठे होते हैं। आप उनसे जब संपर्क करेंगे तो आपको वो लोग सभी चीजों के दाम बता देंगे। बस फिर आप जितना चाहें उतना खाद, बीज और कीटनाशक खरीद सकते हैं।

बस ध्‍यान इस बात का रखिए कि सामान उतना ही खरीदें जो बिक सके। खास तौर पर जिन सामानों को बेचने की एक समय सीमा होती है। क्‍योंकि यदि वो तय समय के अंदर नहीं बिके तो आपको उनका नुकसान उठाना पड़ेगा। सामान लेने के लिए आपको केवल पहली बार खुद उनकी एजेंसी पर जाना होगा। इसके बाद तो आपके पास खुद एजेंसी वाले आने लगेंगे। आप उन्‍हें जितना सामान कहेंगे वो आपकी दुकान पर ही उतनी मात्रा में सामान पहुंचा देंगे। इससे आपका समय और लाने का खर्चा बच जाएगा।

 

लोगों की नियुक्ति करें

 

सभी चीजें पूरी हो जाने पर आपको अपनी दुकान पर लोगों को रखना होता है। इसमें यदि आपके घर या परिवार में कोई युवा बेरोजगार है तो आप उसे अपनी दुकान पर रख सकते हैं। इसका फायदा ये होगा कि आपको अपनी दुकान के लिए भरोसे का आदमी मिल जाएगा। जिसे जरूरत पड़ने पर आप दुकान पर अकेले भी छोड़ सकते हो।

लेकिन यदि आपके पास कोई भी ऐसा आदमी नहीं है तो आप किसी अन्‍य युवा को रख लीजिए। जो कि दिनभर आपके साथ काम में हाथ बंटाता रहे। कृषि सेवा केंद्र पर मुख्‍यत: यही काम होता है कि आपके पास जो भी ग्राहक खाद या बीज के बैग मांगता है उसे वो उठाकर देने होते हैं। इसलिए ऐसे आदमी को ना रखें जो क‍ि खाद और बीज से भरे बोरे उठा ही ना सके।

 

अपने केंद्र का प्रचार प्रसार कीजिए

 

इसके बाद बात आती है कि आप प्रचार प्रसार पर पूरा जोर लगा दीजिए। इसमें आप अपनी दुकान के बाहर बोर्ड लगवा दीजिए। साथ ही अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट पर अपनी दुकान के पोस्‍टर बैनर शेयर कर दीजिए। इसके अलावा अपने दोस्तों को भी शेयर करने का कह दीजिए। कुल मिलाकर हर किसान तक आपके किसान सेवा केंद्र की जानकारी पहुंच जाए।

इसके बाद आप कोशिश कीजिए कि शुरूआती समय में 10 प्रतिशत अपने ग्राहकों को छूट भी दे दीजिए। जिससे ग्राहक आपके पास आने लगें। ज्‍यादा खरीदने पर ग्राहकों को उपहार का प्रबंध कर दीजिए। बस ध्‍यान इस बात का रखिए कि आप जो भी प्रचार प्रसार कीजिए उसे हिन्‍दी और बेहद आसान भाषा में कीजिए। क्‍योंकि किसान ज्‍यादा पढ़े लिखे नहीं होते हैं। साथ ही उपहार के तौर पर ऐसी चीज दें जो एक किसान के लिए उपयोगी सिद्ध हो।

 

कृषि सेवा केंद्र का शुभारंभ करें

 

इसके बाद आप जब भी आपको कोई शुभ दिन लगे उस दिन ऊपर वाले का नाम लेकर कृषि सेवा केंद्र का शुभारंभ कर दीजिए। शुभारंभ के दिन आप ढोल नगाड़े आदि बजवा दीजिए। साथ ही लोगों में प्रसाद भी बंटवा दीजिए। जिससे लोग आपके कृषि सेवा केंद्र के बारे में जान सकेंगे।

क्‍योंकि शुभारंभ से ही यदि लोग आपके कृषि सेवा केंद्र के बारे में जान जाएंगे तो आपकी दुकान पर ग्राहक अगले दिन से ही आने शुरू हो जाएंगे। जिससे आपको आगे चलकर प्रचार प्रसार पर बेहद कम पैसा खर्च करना होगा। अन्‍यथा आपको आगे प्रचार के ऊपर काफी मेहतन करनी होगी।

 

कृषि सेवा केंद्र खोलने की लागत?

 

यदि हम कृषि सेवा केंद्र खोलने की लागत की बात करें तो पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि आप अपना कृषि सेवा केंद्र कहां खोलना चाहते हैं। यदि आप शहर में खोलना चाहते हैं तो आपकी लागत थोड़ी ज्‍यादा आएगी। जबकि यदि आप गांव में खोलना चाहते हैं तो आपकी लागत कम आएगी।

लेकिन अनुमान के तौर पर आप मान सकते हैं कि आप यद‍ि छोटा सा कृषि सेवा केंद्र खोलना चाहते हैं तो भी आपके पास कम से कम 5 से 7 लाख रूपए अवश्‍य होने चाहिए। क्‍योंकि बीज और कीटनाशक का स्‍टॉक जमा करने में आपको काफी पैसे खर्च करने होंगे। साथ ही आपको हर कंपनी की दवाई रखनी होगी। ताकि कोई भी ग्राहक आपके पास से खाली ना जाए।

 

किसान सेवा केंद्र से आमदनी?

 

यदि हम किसान सेवा केंद्र में आमदनी की बात करें तो आमदनी इस बात पर निर्भर करती है कि आपकी सबसे ज्‍यादा बिक्री किस चीज की हो रही है। क्‍योंकि कुछ कंपनी आपको जहां 3 प्रतिशत का मुनाफा देती हैं तो कुछ 5 से 8 प्रतिशत का मुनाफा देती हैं।

इसलिए जरूरी है कि आप अपनी दुकान पर एक तो हर कंपनी का सामान रखें। साथ ही कोशिश करें जो कंपनी आपको ज्‍यादा से ज्‍यादा मुनाफा दे। उसकी बिक्री ज्‍यादा करने की कोशिश करें। इससे आपको कम बिक्री में भी ज्‍यादा मुनाफा देखने को मिलेगा। जो कि ज्‍यादातर दुकानदार करते हैं।

 

ध्‍यान रखने योग्य बातें

 

  • किसान सेवा केंद्र पर आपको इस बात का हमेशा ध्‍यान रखना है कि ग्राहकों को कम से कम उधार सामान देना है। यदि कोई उधार मांगता भी है तो उसे रजिस्‍टर में लिखकर रखना है।
  • ज्‍यादा बिक्री के लिए आपके जो भी बंधे ग्राहक हैं उन्‍हें समय समय पर उपहार आदि भी दे सकते हैं। इससे वो दूसरे ग्राहक को भी आपके पास ही भेजेंगे।
  • कभी भी ऐसी जगह Krushi Seva Kendra ना खोलें जहां पहले से Krushi Seva Kendra खुला हो। इससे आपकी बिक्री काफी कम होगी।
  • बीज और कीटनाशक को आप हमेशा बिक्री के हिसाब से ही खरीदें। क्‍योंकि इनकी बिक्री हमेशा केवल सीजन में ही होती है। इसलिए यदि ये नहीं बिके तो आपको नुकसान होगा।
  • कभी भी अपने मुनाफे के चक्‍कर में ग्राहकों को Expiry कीटनाशक ना दें। थोड़े से फायदे के चक्‍कर में ये आपको आगे चलकर बहुत ज्‍यादा नुकसान पहुंचाएगा।
  • Krushi Seva Kendra पर हमेशा जो भी ग्राहक आएं उनके साथ मित्रवत् व्‍यवहार रखिए। क्‍योंकि बिना मित्रता के आप ग्राहक नहीं बना सकते हैं।
  • अपने लाइसेंस की समय सीमा समाप्‍त हो जाने पर इसे आगे बढ़वाते रहें। क्‍योंकि जांच के दौरान यदि सही दस्‍तावेज नहीं पाए जाते तो आपके ऊपर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
  • कई कीटनाशक इतने खतरनाक होते हैं कि वो बच्‍चों को नहीं दिए जाते हैं। इसलिए आप कम उम्र की आयु के लोगों को ऐसे कीटनाशक ना बेचें।
  • जो कीटनाशक दवाइयां बच्‍चों से दूर रखनी होती हैं। उन्‍हें ग्राहक को देते समय ही बता दें। क्‍योंकि जानकारी के अभाव में कई बार घर में वो बच्‍चों के हाथ में लग जाती हैं।

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