क्रेडिट कार्ड के बिल की भरपाई के लिए पर्सनल लोन लेना कितना सही, क्या कहते हैं जानकार? ( Code 0032 )

क्रेडिट कार्ड के बिल की भरपाई के लिए पर्सनल लोन लेना कितना सही, क्या कहते हैं जानकार? ( Code 0032 )

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क्रेडिट कार्ड के बिल की भरपाई के लिए पर्सनल लोन लेना कितना सही, क्या कहते हैं जानकार?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भारत में अमेरिका व यूरोप जैसे विकसित क्षेत्रों के मुकाबले अभी काफी छोटे पैमाने पर होता है. इसमें धीरे-धीरे बदलाव हो रहा है और लोग क्रेडिट की सुविधा लेने लगे हैं. कहा जाता है कि आप क्रेडिट कार्ड से खर्च उतना ही करें जितना आप उसका भुगतान करने की क्षमता रखते हैं. हालांकि, कई बार ऐसा होता है कि आप जरूरत के समय या किसी अन्य कारणवश क्रेडिट से अधिक खर्च करते हैं जिसे ड्यू डेट तक चुकाना आपके लिए भारी हो जाता है.

ऐसे में लोग पर्सनल लोन का सहारा लेते हैं. क्या एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेना समझदारी होती है? इस लेख में हम यही बात करेंगे और यह भी जानेंगे कि एक्सपर्ट्स की इस पर क्या राय है. आपको बता दें कि भारत में क्रेडिट कार्ड बिल पर 3.-4.5 फीसदी का मासिक ब्याज लिया जाता है. वहीं, पर्सनल लोन 10.25 फीसदी वार्षिक से 30 फीसदी सालाना के ब्याज तक जा सकता है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

फाइनेंशियल एक्सप्रेस में छपी एक खबर में इंडिया लैंड्स के संस्थापक व सीईओ गौरव चोपड़ा कहते हैं कि अगर केवल ब्याज के नजरिए से देखा जाए तो क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने के लिए पर्सनल लोन लेना सही लगता है. वह कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति अपना पूरा क्रेडिट कार्ड बिल नहीं भर सकता है तो उसे पर्सनल लोन लेकर बिल भर देना चाहिए. वित्तीय मामलों के जानकार इसके पीछे 2 कारण बताते हैं. पहला यह कि पर्सनल लोन सस्ता है और आपको उसकी भरपाई के लिए लंबा समय मिलता है. दूसरा कि क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान नहीं करने के कारण कर्जदार का जो क्रेडिट प्रोफाइल खराब होना था वह उससे बच जाता है. क्रेडिट स्कोर खराब होने से भविष्य में ग्राहक के लिए लोन महंगा हो सकता है.

क्या है जोखिम?

क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान के लिए पर्सनल लोन लेने का एक दूसरा पहलू भी है. वन फाइनेंस के उपाध्यक्ष अखिल राठी कहते हैं कि ब्याज को ध्यान में रखकर पर्सनल लोन से क्रेडिट कार्ड का बिल भुगतान करना सस्ता लगता है लेकिन वास्तविकता ये है कि आप बिल भुगतान को और देरी से कर रहे हैं. वह कहते हैं कि आप इस तरह से क्रेडिट का बिल लंबे समय तक कई महीनों में भरते हैं. इससे भविष्य में आपका नकदी प्रवाह प्रभावित होने की आशंका है.

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